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उत्तमा भक्ति के लक्षण (भाग २)

Shri Krishna with Go

श्री हरिभक्तिविलास की विज्ञप्ति से उद्धृत। प्रसिद्ध मानसभाव शब्द से स्थायी एवं सञ्चारी भावसमूह का बोध होता है । प्रीति विषादात्मक शब्द का अर्थ – रागात्मक एवं द्वेषात्मक है । वाचिक चेष्टा–कीर्तन, मानस चेष्टा–स्मरण, शारीर चेष्टा–श्रवणादि हैं । निवृत्त्यात्मक चेष्टा…

उत्तमा भक्ति के लक्षण (भाग १)

Shri Krishna playing flute

श्री हरिभक्तिविलास की विज्ञप्ति से उद्धृत। अनुशासित मानव जीवन अभ्युदय अर्थात् उन्नति, भाग्योदय, सौभाग्य, श्रीवृद्धि, आनन्द, इष्टलाभ का एकमात्र हेतु है। अनुशासन के अभाव से मानव जीवन अतीव अशिव होता है, यहाँतक कि – अनुशासन हीन एक मानव ही पृथ्वी…