श्री गुरुपूर्णिमा उत्सव अत्यंत सुंदर रूप से संपन्न हुआ, जिसमें आश्रम के शिष्यों, भक्तों और शुभचिंतकों ने भाग लिया। संपूर्ण प्रातःकाल कीर्तन होते रहे। श्री महाराज-जी, श्री परम गुरु-जी और श्री हरिदासेश्वर-जी (श्री हनुमान-जी) की समाधियों पर माल्यार्पण के पश्चात्, शिष्यों और भक्तों ने जगमोहन में श्री महाराज-जी को माला अर्पित की तथा ठाकुर-जी एवं श्री महाराज-जी की प्रसन्नता हेतु कीर्तन गाए। इस अवसर पर दो ग्रन्थों का विमोचन एवं प्रस्तुतिकरण हुआ: व्रज-विहार-काव्यम् तथा चतुःश्लोकी भाष्यम्। श्री हरिदास निवास पत्रिका नामक ई-पत्रिका भी अंग्रेज़ी एवं हिंदी दोनों भाषाओं में प्रकाशित की गई। यह पत्रिका श्री महाराज-जी द्वारा प्रारंभ की गई थी और अब पुनः विद्युतीय रूप में प्रारंभ की गई है। इसका प्रयोजन शिष्यों एवं अनुयायियों में श्री महाराज-जी की स्मृति जागृत करना तथा मंदिर, आश्रम एवं गोशाला की गतिविधियों की सूचना प्रदान करना है। त्रिपुरा से पधारी एक नृत्य मण्डली द्वारा व्रज में श्री-कृष्ण की लीलाओं का अभिनय करते हुए, श्री श्री गौर गदाधर एवं श्री श्री राधा गोविंद-जी की प्रसन्नता हेतु प्रांगण में एक सुंदर नृत्य प्रस्तुति दी गई।




























